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दहेज़ प्रतिषेध अधिनियम, 1961

यह अधिनियम 20 मई 1961 को पारित हुआ और 1 जुलाई 1961 से लागू है। यह एक केंद्रीय कानून है, इसलिए पूरे भारत में समान रूप से लागू होता है। 1984 और 1986 के संशोधनों से ही इसकी सजाएं मौजूदा स्तर तक पहुंचीं।

धारा 3

दहेज़ लेना या देना

कम से कम 5 साल की कैद और 15,000 रुपये या दहेज़ के मूल्य, जो भी अधिक हो, का जुर्माना। अदालत 5 साल से कम सजा दे सकती है, लेकिन केवल पर्याप्त और विशेष कारणों से, जिन्हें फैसले में दर्ज करना होगा।

कम से कम 5 साल
धारा 4

दहेज़ की मांग

6 महीने से 2 साल तक की कैद और 10,000 रुपये तक जुर्माना। यह वह धारा है जिसके बारे में सबसे कम लोग जानते हैं। कुछ भी दिया जाना जरूरी नहीं है।

6 महीने से 2 साल
धारा 4A

दहेज़ का विज्ञापन

विवाह के बदले संपत्ति या व्यवसाय में हिस्सा देने का विज्ञापन देने पर 6 महीने से 5 साल, या 15,000 रुपये तक जुर्माना। ऐसा विज्ञापन छापना भी अपराध है।

धारा 6

दहेज़ महिला को सौंपना अनिवार्य

यदि दहेज़ महिला के अलावा किसी और को मिला है, तो वह उसके लिए न्यास में रखा माना जाएगा और उसे सौंपना होगा। ऐसा न करने पर 6 महीने से 2 साल की कैद और 5,000 से 10,000 रुपये जुर्माना।

धारा 8A

सबूत का भार

दहेज़ लेने या मांगने के आरोपी पर यह साबित करने का भार होगा कि उसने अपराध नहीं किया। यह आपराधिक कानून में असामान्य है, और 1986 के संशोधन से जोड़ा गया।

भारतीय न्याय संहिता, 2023

BNS 1 जुलाई 2024 से लागू हुई और उसने भारतीय दंड संहिता (IPC) की जगह ली। दहेज़ से जुड़ी दोनों धाराएं अपनी पूरी विषयवस्तु के साथ आगे बढ़ीं, सिर्फ नंबर बदले।

धारा 85 (पहले IPC 498A)

पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता

3 साल तक की कैद और जुर्माना। यह धारा सिर्फ पति तक सीमित नहीं है, पति का कोई भी रिश्तेदार इसके दायरे में आता है। इसी वजह से सास, ननद या ससुर को भी नामजद किया जा सकता है।

3 साल तक
धारा 86

क्रूरता की परिभाषा

(क) ऐसा जानबूझकर किया गया आचरण जो महिला को आत्महत्या के लिए प्रेरित करे, या उसके जीवन, अंग या स्वास्थ्य (मानसिक या शारीरिक) को गंभीर खतरे में डाले।

(ख) संपत्ति की किसी गैरकानूनी मांग को पूरा कराने के लिए, या मांग पूरी न होने पर, महिला को प्रताड़ित करना।

मानसिक और आर्थिक प्रताड़ना भी इसमें शामिल है। मारपीट होना जरूरी नहीं।

धारा 80 (पहले IPC 304B)

दहेज़ हत्या

यदि शादी के 7 साल के भीतर महिला की जलने, शारीरिक चोट या अन्य असामान्य परिस्थितियों में मृत्यु हो, और यह दिखाया जाए कि मृत्यु से कुछ समय पहले उसे दहेज़ के लिए प्रताड़ित किया गया था, तो वह दहेज़ हत्या है।

सजा: कम से कम 7 साल, आजीवन कारावास तक। भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 की धारा 118 के तहत अदालत यह मानकर चलेगी कि आरोपी ने ही मृत्यु कारित की, और इसे गलत साबित करने का भार आरोपी पर होगा।

7 साल से आजीवन

सजा एक नजर में

दहेज़ से जुड़े अपराध और सजा
अपराधधारासजा
दहेज़ लेना या देनादहेज़ प्रतिषेध अधिनियम, धारा 3 कम से कम 5 साल
दहेज़ मांगनाधारा 4 6 महीने से 2 साल
दहेज़ का विज्ञापनधारा 4A 6 महीने से 5 साल
महिला को दहेज़ न सौंपनाधारा 6 6 महीने से 2 साल
दहेज़ के लिए क्रूरताBNS धारा 85 3 साल तक
दहेज़ हत्याBNS धारा 80 7 साल से आजीवन

दहेज़ प्रतिषेध अधिनियम के अपराध संज्ञेय, गैर-जमानती और गैर-शमनीय हैं। गैर-शमनीय का मतलब है कि आपसी समझौते से मुकदमा वापस नहीं लिया जा सकता।

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अगर आपको दहेज़ के लिए परेशान किया जा रहा है

यह कानूनी सलाह नहीं है। यह पेज भारतीय कानून की सामान्य जानकारी देता है। आपके मामले के लिए वकील से सलाह लें। तुरंत खतरा हो तो पहले 112 पर कॉल करें। देखें कानूनी अस्वीकरण

स्रोत

आम सवाल

BNS धारा 85 क्या है?

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 85 पति या पति के रिश्तेदार द्वारा महिला के साथ क्रूरता को अपराध बनाती है, जिसकी सजा 3 साल तक की कैद और जुर्माना है। यह धारा 1 जुलाई 2024 से IPC की धारा 498A की जगह लागू हुई। धारा 86 क्रूरता की परिभाषा देती है, जिसमें दहेज़ की गैरकानूनी मांग के लिए की गई प्रताड़ना शामिल है।

क्या IPC 498A अब भी लागू है?

1 जुलाई 2024 के बाद हुए अपराधों पर IPC 498A लागू नहीं होती, लेकिन उस तारीख से पहले दर्ज मुकदमे उसी धारा के तहत चलते रहते हैं। इसलिए अदालतों में दोनों धाराएं आने वाले कई साल तक दिखाई देंगी।

दहेज़ हत्या में क्या सजा है?

भारतीय न्याय संहिता की धारा 80 के तहत दहेज़ हत्या में कम से कम 7 साल की कैद है, जो आजीवन कारावास तक बढ़ सकती है। यदि अभियोजन पक्ष यह साबित कर दे कि शादी के 7 साल के भीतर असामान्य मृत्यु हुई और उससे कुछ समय पहले दहेज़ के लिए प्रताड़ना हुई थी, तो भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 की धारा 118 के तहत अदालत यह मानकर चलेगी कि आरोपी ने ही मृत्यु कारित की।

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