प्रक्रिया
शिकायत कैसे करें।
वकील की जरूरत शुरू में नहीं है, और यह जानना भी जरूरी नहीं कि कौन सी धारा लगेगी। यह काम थाने का है।
181 पर कॉल करें। फिर किसी भी थाने में लिखित शिकायत देकर FIR दर्ज कराएं। थाना मना नहीं कर सकता।
दो गलतफहमियां ज्यादातर लोगों को शिकायत करने से रोकती हैं। पहली, कि कानून की जानकारी होनी चाहिए। नहीं चाहिए। दूसरी, कि जब तक पैसा न दिया जाए तब तक कुछ नहीं हो सकता। यह भी गलत है: धारा 4 के तहत सिर्फ मांगना ही अपराध है।
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पहले हेल्पलाइन पर कॉल करें
ये मुफ्त हैं और पूरे भारत में चलती हैं। ये सुरक्षा का इंतजाम करा सकती हैं और बता सकती हैं कि आपके इलाके में किस दफ्तर जाना है।
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जो हुआ, वह लिख लें
अपने शब्दों में, सादी भाषा में। कोई कानूनी भाषा जरूरी नहीं। इसमें यह होना चाहिए:
- क्या मांगा गया, एक-एक चीज, रकम सहित।
- किसने मांगा। हर व्यक्ति का नाम अलग से लिखें।
- कब। तारीखें, अंदाजन ही सही।
- मांग पूरी न होने पर क्या कहा या किया गया।
- और कौन मौजूद था या जानता है।
सबूत संभालकर रखें: मैसेज, बैंक ट्रांसफर, रसीदें, शादी में दिए गए सामान की सूची, फोटो, मेडिकल रिपोर्ट। कुछ भी देने से पहले उसकी कॉपी रख लें।
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किसी भी थाने जाएं
किसी भी थाने में। जीरो FIR किसी भी थाने में दर्ज हो सकती है, चाहे अपराध कहीं और हुआ हो, और बाद में सही थाने भेज दी जाती है।
साफ शब्दों में FIR दर्ज करने को कहें। और FIR की मुफ्त प्रति लेकर ही निकलें, यह आपका अधिकार है।
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थाना मना करे तो आगे बढ़ें
ऐसा होता है, और यह गैरकानूनी है।
पहले, अपनी लिखित शिकायत पुलिस अधीक्षक (SP) को रजिस्टर्ड डाक या ईमेल से भेजें और भेजने का सबूत रखें। यह प्रावधान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 173 में है।
फिर भी कार्रवाई न हो तो धारा 175 के तहत मजिस्ट्रेट के पास आवेदन करें। मजिस्ट्रेट पुलिस को जांच का निर्देश दे सकते हैं।
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साथ-साथ ये रास्ते भी अपनाएं
- जिला दहेज़ प्रतिषेध अधिकारी। अधिनियम की धारा 8B के तहत नियुक्त, और दहेज़ की शिकायत पर कार्रवाई करना इनका कानूनी दायित्व है।
- राष्ट्रीय महिला आयोग, 7827-170-170, या आपके राज्य का महिला आयोग।
- घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 के तहत संरक्षण अधिकारी। यह दीवानी रास्ता है और अक्सर तेज है: संरक्षण आदेश, निवास का अधिकार, और भरण-पोषण।
- जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मुफ्त कानूनी सहायता के लिए।
आगे क्या होगा
- तुरंत गिरफ्तारी की उम्मीद न रखें। BNS 85 में सजा 7 साल से कम है, इसलिए अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य के फैसले के अनुसार पुलिस पहले नोटिस देती है। यह आपकी शिकायत को नजरअंदाज करना नहीं है।
- समझौते का दबाव आएगा। लेकिन दहेज़ प्रतिषेध अधिनियम के अपराध गैर-शमनीय हैं, यानी आपसी समझौते से मुकदमा वापस नहीं होता।
- समय लगेगा। हर कागज की अपनी कॉपी रखें।
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अगर आपको दहेज़ के लिए परेशान किया जा रहा है
स्रोत
आम सवाल
दहेज़ की शिकायत कहां करें?
सबसे पहले 181 महिला हेल्पलाइन पर कॉल करें, या तुरंत खतरा हो तो 112 पर। इसके बाद किसी भी पुलिस थाने में लिखित शिकायत दें। दहेज़ के अपराध संज्ञेय हैं, इसलिए थाने को FIR दर्ज करनी ही होगी और आपको उसकी मुफ्त प्रति देनी होगी। समानांतर रूप से जिला दहेज़ प्रतिषेध अधिकारी और राज्य महिला आयोग से भी संपर्क किया जा सकता है।
अगर पुलिस FIR दर्ज न करे तो क्या करें?
पुलिस संज्ञेय अपराध में FIR दर्ज करने से मना नहीं कर सकती। यदि थाना मना करे, तो अपनी लिखित शिकायत पुलिस अधीक्षक (SP) को भेजें, जिसका प्रावधान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 173 में है। फिर भी कार्रवाई न हो तो धारा 175 के तहत मजिस्ट्रेट के पास आवेदन करें, जो पुलिस को जांच का निर्देश दे सकते हैं।